चहु प्रकार जेवनार भई बहु भाँतिन्ह।
भोजन करत अवधपति सहित बरातिन्ह॥
तरह-तरह से (भक्ष्य, भोज्य, चोष्य, लेह्य) चारों प्रकार का भोजन बनाया गया; बरातियों के सहित महाराज दशरथ भोजन करने लगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जानकी मंगल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जानकी मंगल के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।