गे जनवासे राउ संगु सुत सुतबहु।
जनु पाए फल चारि सहित साधन चहु॥
फिर महाराज संग में पुत्र और पुत्रवधुओं को लेकर जनवासे में गये; (ऐसा लगता था) मानो उन्होंने चारों साधनों के सहित चारों फल (अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष) प्राप्त कर लिये।
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