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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 183
मंगल निधान बिलोकि लोयन लाह लूटति नागरी। जेठि भरत कहँ ब्याहि रूप रति सय सम॥
महाराज जनक के छोटे भाई (कुशध्वज)-की जो परम सुन्दरी कन्याएँ थीं, उनमें बड़ी (माण्डवी)-का विवाह भरतजी के साथ हुआ, जो सुन्दरता में सैकड़ों रतियों के समान थी।
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