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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 182
जुबति जूथ रनिवास रहस बस एहि बिधि। देखि देखि सिय राम सकल मंगल निधि॥
इस प्रकार युवतियों का झुंड और सम्पूर्ण रनिवास समस्त मंगलों की खानि श्रीरामजानकी को देख-देखकर आनन्द के वशीभूत हो रहा है।
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