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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 179
चतुर नारि बर कुँवरिहि रीति सिखावहिं। देहिं गारि लहकौरि समौ सुख पावहिं॥
चतुर स्त्रियाँ वर और दुलहिन को कुलरीति सिखाती हैं और लहकौरी की विधि के समय गाली गाकर सुख मानती हैं।
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