जिस समय जानकीजी के भाई की आवश्यकता हुई, उस समय वहाँ (पृथ्वी का पुत्र) मंगलग्रह (स्वयं) आया और अपने को छिपाकर सब रीति-रस्म करके अपना सुन्दर सम्बन्ध जनाया।
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