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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 176
मन भावत बिधि कीन्ह मुदित भामिनि भईं। बर दुलहिनिहि लवाइ सखीं कोहबर गईं गयीं॥
विधाता ने जो कुछ हमारे मन को प्रिय लगता था, वही कर दिया यह सोचकर (सभी) स्त्रियाँ आनन्दित हुईं और फिर (जानकीजी) सखियाँ दूल्हा और दुलहिन को लेकर कोहबर (कुलदेवता के स्थान) में गयीं।
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