सिंदूर-वन्दन तथा लाजाहोम की विधि सम्पन्न करके भाँवर होने लगी। फिर सिलपोहनी (अश्मारोहण) विधि की गयी। (उस समय) भगवान् की मन-मोहिनी साँवली मूर्ति ने सबके मन हर लिये।
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