महाराज जनक ने संकल्प करके शील, सुख और शोभामयी श्रीजानकीजी भगवान् राम को समर्पण कर दीं - (ठीक उसी तरह) जैसे गिरिराज हिमवान् ने शंकरजी को पार्वतीजी और सागर ने भगवान् श्रीहरि को लक्ष्मीजी समर्पण की थीं।
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