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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 172
अगिनि थापि मिथिलेस कुसोदक लीन्हेउ। कन्या दान बिधान संकलप कीन्हेउ॥
मिथिलापति (महाराज जनक)-ने अग्नि-स्थापन करके कुश और जल लिया तथा कन्या-दान की विधि के लिये संकल्प किया।
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