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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 169
जुबति जुत्थ महँ सीय सुभाइ बिराजइ। उपमा कहत लजाइ भारती भाजइ॥
स्त्रियों के झुंड में जानकीजी स्वभाव से ही शोभा पा रही हैं। सरस्वती उपमा कहने में लजाकर भाग जाती हैं।
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