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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 168
बरहि पूजि नृप दीन्ह सुभग सिंहासन। चली दुलहिनिहि ल्याइ पाइ अनुसासन॥
राजा जनक ने वर का पूजन करके सुन्दर सिंहासन दिया और सखियाँ आज्ञा पा दुलहिन को लेकर चलीं।
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