तब जनक सहित समाज राजहि उचित रुचिरासन दए।
कौसिक बसिष्ठहि पूजि पूजे राउ दै अंबर नए॥
तब जनकजी ने समाजसहित महाराज दशरथ को सुन्दर आसन दिये और कौशिकमुनि तथा वसिष्ठजी की पूजा करके नवीन वस्त्र अर्पण कर महाराज दशरथ की पूजा की।
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