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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 164
तब जनक सहित समाज राजहि उचित रुचिरासन दए। कौसिक बसिष्ठहि पूजि पूजे राउ दै अंबर नए॥
तब जनकजी ने समाजसहित महाराज दशरथ को सुन्दर आसन दिये और कौशिकमुनि तथा वसिष्ठजी की पूजा करके नवीन वस्त्र अर्पण कर महाराज दशरथ की पूजा की।
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