रामहि भाइन्ह सहित जबहिं मुनि जोहेउ।
नैन नीर तन पुलक रूप मन मोहेउ॥
जिस समय मुनि ने भाइयों के सहित श्रीरामचन्द्रजी को देखा, तब उनके नेत्रों में जल भर आया, शरीर पुलकित हो गया और मन मोहित हो गया।
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