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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 157
उमा रमादिक सुरतिय सुनि प्रमुदित भईं। कपट नारि बर बेष बिरचि मंडप गईं ॥
उसे सुनकर पार्वतीजी, लक्ष्मीजी एवं अन्य देवताओं की स्त्रियाँ आनन्दित हुईं और स्त्रियों का सुन्दर छद्म-वेष बनाकर मंडप में गयीं।
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