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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 155
तीनि लोक अवलोकहिं नहिं उपमा कोउ। दसरथ जनक समान जनक दसरथ दोउ॥
तीनों लोकों को देखते हैं; (परंतु) कहीं कोई उपमा नहीं मिलती। बस, महाराज दशरथ और जनक के समान तो जनक और दशरथ दो ही हैं।
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