(तब) शतानन्दमुनि ने (जनवासे में) जाकर अयोध्यापति (महाराज दशरथ)-से कहा —’पधारिये’ और वे गुरु (वसिष्ठ), गौरी, शिवजी और गणेशजी को स्मरणकर चले।'
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