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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 150
पठई भेंट बिदेह बहुत बहु भाँतिन्ह। देखत देव सिहाहिं अनंद बरातिन्ह॥
महाराज जनक ने अनेक प्रकार के बहुत-से उपहार भेजे, जिन्हें देखकर देवता (भी) ईर्ष्या करते हैं और बरातियों को भी बड़ा आनन्द होता है।
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