हृदयँ लाइ लिए गोद मोद अति भूपहि।
कहि न सकहिं सत सेष अनंद अनूपहि॥
महाराज ने श्रीराम और लक्ष्मण को हृदय से लगाकर गोद में बिठा लिया। उस समय उन्हें अत्यन्त आनन्द हुआ। उस अनुपम आनन्द को सैकड़ों शेष भी वर्णन नहीं कर सकते।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जानकी मंगल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जानकी मंगल के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।