नगर में बड़ा आनन्द, कौतुक (खेल) और कोलाहल (हल्ला) हो रहा है। उसका वर्णन कहाँ हो सकता है। फिर बरात को ले जाकर जहाँ सब प्रकार का नित्य-नूतन सुभीता था, वहाँ जनवासा दिया। (बरात को ठहराया गया)
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जानकी मंगल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जानकी मंगल के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।