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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 144
आनंदपुर कौतुक कोलाहल बनत सो बरनत कहाँ। लै दियो तहँ जनवास सकल सुपास नित नूतन जहाँ॥
नगर में बड़ा आनन्द, कौतुक (खेल) और कोलाहल (हल्ला) हो रहा है। उसका वर्णन कहाँ हो सकता है। फिर बरात को ले जाकर जहाँ सब प्रकार का नित्य-नूतन सुभीता था, वहाँ जनवासा दिया। (बरात को ठहराया गया)
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