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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 143
नियरानि नगर बरात हरषी लेन अगवानी गए। देखत परस्पर मिलत मानत प्रेम परिपूरन भए॥
बरात नगर के समीप पहुँच गयी। तब सब लोग प्रसन्न होकर अगवानी लेने (स्वागत करने) गये। सब एक-दूसरे को देखते और मिलते हैं तथा आप्तकाम होकर बड़ा प्रेम मानते हैं।
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