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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 142
बाजहिं ढोल निसान सगुन सुभ पाइन्हि। सिय नैहर जनकौर नगर नियराइन्हि॥
ढोल और नगारे बज रहे हैं और शुभ शकुन हो रहे हैं। इस प्रकार जानकीजी का नैहर जनकौर (जनकपुर) समीप आ गया।
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