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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 141
राउ छाँड़ि सब काज साज सब साजहिं। चलेउ बरात बनाइ पूजि गनराजहिं॥
महाराज (दशरथ) (अन्य) सब कामों को छोड़कर बरात का सामान सजाने लगे और बरात बनाकर गणेशजी का पूजन करके चल पड़े।
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