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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 140
सुनि पुर भयउ अनंद बधाव बजावहिं। सजहिं सुमंगल कलस बितान बनावहिं॥
इस समाचार को सुनकर नगर में बड़ा आनन्द हुआ और बधावे बजने लगे। सब ओर (विवाहार्थ) मंगल-कलश सजाये जाने लगे और जहाँ-तहाँ वितान (चाँदनियाँ) ताने गये।
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