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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 14
अनुराग भाग सोहाग सील सरूप बहु भूषन भरी। हिय हरषि सुतन्ह समेत रानी आइ रिषि पायन्ह परी॥
प्रेम, भाग्य, सौभाग्य, शील, सुन्दरता और बहुत-से आभूषणों से भरी हुई रानियाँ हृदय से आनन्दित हो अपने पुत्रों सहित ऋषि के पैरों पर पड़ीं।
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