शतानन्दमुनि का आगमन सुनकर महाराज (दशरथ) आगे आये और पूजा करके उनका सम्मान किया। फिर मुनि ने कुशल सुनाकर उन्हें लग्नपत्रिका दी। (इससे) राजा दशरथ बहुत हर्षित हुए।
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