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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 139
नृप सुनि आगे आइ पूजि सनमानेउ। दीन्हि लगन कहि कुसल राउ हरषानेउ॥
शतानन्दमुनि का आगमन सुनकर महाराज (दशरथ) आगे आये और पूजा करके उनका सम्मान किया। फिर मुनि ने कुशल सुनाकर उन्हें लग्नपत्रिका दी। (इससे) राजा दशरथ बहुत हर्षित हुए।
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