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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 137
प्रथम हरदि बंदन करि मंगल गावहिं। करि कुल रीति कलस थपि तेलु चढ़ावहिं॥
पहले हरिद्रा-वन्दन करके अर्थात् हल्दी चढ़ाकर मंगल-गान करती हैं और कुल की रीति करके कलश-स्थापन कर तेल चढ़ाती हैं।
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