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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 136
सीय राम हित पूजहिं गौरि गनेसहि। परिजन पुरजन सहित प्रमोद नरेसहि॥
श्रीरामचन्द्रजी और जानकीजी के लिये वे गौरी और गणेश की पूजा करती हैं। (इस प्रकार) सभी परिवार के लोगों एवं पुरजनों के सहित राजा को परम आनन्द हो रहा है।
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