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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 134
कौसिकहि पूजि प्रसंसि आयसु पाइ नृप सुख पायऊ। लिखि लगन तिलक समाज सजि कुल गुरहि अवध पठायऊ॥
कौशिकमुनि की पूजा और प्रशंसा करके उनकी आज्ञा पा राजा सुखी हुए तथा लग्न लिखकर तिलक की सामग्री सजा अपने कुलगुरु (शतानन्दजी)-को अयोध्या भेजा।
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