गए राम गुरु पहिं राउ रानी नारि-नर आनंद भरे।
जनु तृषित करि करिनी निकर सीतल सुधासागर परे॥
श्रीरामचन्द्रजी गुरु के यहाँ गये। राजा-रानी, स्त्री-पुरुष सब उसी प्रकार आनन्द से भर गये, मानो प्यासे हाथी-हथिनियों का झुंड शीतल अमृतसागर में जा गिरा हो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जानकी मंगल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जानकी मंगल के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।