काहूँ न कीन्हेउ सुकृत सुनि मुनि मुदित नृपहि बखानहीं।
महिपाल मुनि को मिलन सुख महिपाल मुनि मन जानहीं॥
महाराज ने कहा कि ‘हमारे समान किसी ने पुण्य नहीं किया।’ यह बात सुनकर मुनि ने प्रसन्न हो महाराज की बड़ाई की। उस समय महाराज और मुनि के मिलन-सुखको महाराज और मुनि का मन ही जानता था।
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