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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 129
लसत ललित कर कमल माल पहिरावत। काम फंद जन चंदहि बनज फँसावत॥
जयमाल पहनाते समय उनके सुन्दर करकमल ऐसे सुशोभित जान पड़ते हैं मानो कमल कामदेव के फंदे में चन्द्रमा को फँसाते हों।
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