कर कमलनि जयमाल जानकी सोहइ।
बरनि सकै छबि अतुलित अस कबि को हइ॥
जानकीजी के करकमलों में जयमाला शोभा दे रही है; भला ऐसा कौन कवि है, जो उस अतुलित छबि का वर्णन कर सके।
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