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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 123
गंजेउ सो गर्जेउ घोर धुनि सुनि भूमि भूधर लरखरे। रघुबीर जस मुकता बिपुल सब भुवन पटु पेटक भरे॥
धनुष को जब तोड़ा गया, तब उसका ऐसा घोर गर्जन हुआ कि उसे सुनकर पृथ्वी और पर्वत डगमगा गये। श्रीरामचन्द्रजी के सुयशरूपी बहुत से मोतियों से समस्त भुवन-मण्डलरूप सुन्दर पिटारे भर गये।
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