प्रेम परखि रघुबीर सरासन भंजेउ।
जनु मृगराज किसोर महागज भंजेउ॥
श्रीजानकीजी के प्रेम को परखकर श्रीरामचन्द्रजी ने धनुष को उसी प्रकार तोड़ दिया, जैसे कोई सिंह का बच्चा बड़े भारी हाथी को मार डाले।
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