अपने प्रिय पाहुने को पाकर राजा दशरथ ने उनकी पूजा करके खूब पहुनाई की और कहा कि 'हमारे समान किसी ने पुण्य नहीं किया’ (जिसके प्रभाव से हमें आपका दर्शन हुआ)।
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