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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 12
पूजि पहुनई कीन्ह पाइ प्रिय पाहुन। कहेउ भूप मोहि सरिस सुकृत किए काहु न॥
अपने प्रिय पाहुने को पाकर राजा दशरथ ने उनकी पूजा करके खूब पहुनाई की और कहा कि 'हमारे समान किसी ने पुण्य नहीं किया’ (जिसके प्रभाव से हमें आपका दर्शन हुआ)।
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