गए सुभायँ राम जब चाप समीपहि।
सोच सहित परिवार बिदेह महीपहि॥
जब श्रीरामचन्द्रजी सहज भाव से धनुष के समीप गये, तब परिवारसहित राजा जनक सोच में पड़ गये।
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