लक्ष्मणजी पृथ्वी और शेषादि से बल बढ़ाने के लिये कहते हैं; क्योंकि अब शीघ्र ही श्रीरामचन्द्रजी शिवजी के धनुष को चढ़ाना चाहते हैं।
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