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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 111
रोम रोम छबि निंदति सोभ मनोजनि। देखिय मूरति मलिन करिय मुनि सो जनि॥
श्रीरामचन्द्रजी की रोम-रोम की शोभा अनेक कामदेवों की छबि का भी तिरस्कार करने वाली है। हे मुने! ऐसा न कीजिये कि यह मूर्ति मलिन देखी जाय (क्योंकि यदि इनसे धनुष न टूटा तो इनकी यह प्रसन्नता नष्ट हो जायगी।)
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