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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 108
बानु बानु जिमि गयउ गवहिं दसकंधरु। को अवनी तल इन सम बीर धुरंधरु॥
(तात्पर्य यह कि यद्यपि आपके आशीर्वाद से श्रीराम के लिये यह धनुष तोड़ना कोई बड़ी बात नहीं है, फिर भी जैसी वस्तुस्थिति है, उसे देखते हुए तो ऐसा होना असम्भव ही जान पड़ता है; क्योंकि देखिये, इस धनुष को देखकर) बाणासुर बाण के समान भाग गया और रावण भी चुपके से (अपने घर) चला गया। भला इनके समान धुरंधर वीर पृथ्वीतल में कौन है।
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