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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 107
मुनिबर तुम्हरें बचन मेरु महि डोलहिं। तदपि उचित आचरत पाँच भल बोलहिं॥
(महाराज जनक ने कहा-) ‘हे मुनिवर! आपके वचन से पर्वत और पृथ्वी भी डोल सकते हैं; तो भी उचित आचरण करने से सब लोग प्रशंसा करते हैं।
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