कौसिक जनकहि कहेउ देहु अनुसासन।
देखि भानु कुल भानु इसानु सरासन॥
(तब) कौशिकमुनि ने महाराज जनक से कहा—’आप आज्ञा दीजिये। सूर्यकुल के सूर्य श्रीरामचन्द्रजी शंकरजी के धनुष को देखें।'
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