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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 105
धनुर्भंग देखि सपुर परिवार जनक हिय हारेउ। नृप समाज जन तुहिन बनज बन मारेउ॥
पुरवासी एवं परिवार के सहित महाराज जनक यह देखकर हृदय में हार गये अर्थात् निराश हो गये और राजाओं के समाजरूपी कमलवन को तो मानो पाला मार गया।
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