नहि सगुन पायउ रहे मिसु करि एक धनु देखन गए।
टकटोरि कपि ज्यों नारियरु, सिरु नाइ सब बैठत भए॥
जब राजाओं को शुभ शकुन नहीं मिला, तब वे बहाना बनाकर बैठ गये। उनमें से कोई धनुष देखने के लिये गये और जैसे बंदर नारियल को टटोलकर छोड़ देता है, वैसे ही वे सब धनुष को टटोलकर सिर नीचा करके बैठ गये।
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