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जानकी मंगल • अध्याय 1 • श्लोक 102
तब बिदेह पन बंदिन्ह प्रगट सुनायउ। उठे भूप आमरषि सगुन नहिं पायउ॥
तब बंदीजनों ने महाराज जनक की शर्त को स्पष्ट करके सुनाया। उसे सुनकर राजा लोग जोश में आकर उठे, परंतु कोई शकुन नहीं बना।
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