अथवा सत्यमीशानं ज्ञानमानन्दमद्वयम् । अत्यर्थममलं नित्यमादिमध्यान्तवर्जितम् ॥
ध्यान का दूसरा भेद इस प्रकार है - जो सत्यरूप, सर्वेश्वर, ज्ञानमय, आनन्दस्वरूप, अनुपम, अतिनिर्मल, नित्य एवं आदि, मध्य तथा अन्त रहित है
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