मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
जाबाल दर्शन • अध्याय 9 • श्लोक 3
अथवा सत्यमीशानं ज्ञानमानन्दमद्वयम् । अत्यर्थममलं नित्यमादिमध्यान्तवर्जितम् ॥
ध्यान का दूसरा भेद इस प्रकार है - जो सत्यरूप, सर्वेश्वर, ज्ञानमय, आनन्दस्वरूप, अनुपम, अतिनिर्मल, नित्य एवं आदि, मध्य तथा अन्त रहित है
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जाबाल दर्शन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

जाबाल दर्शन के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें