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जाबाल दर्शन • अध्याय 8 • श्लोक 4
जान्वन्तं पृथिवी हांशो ह्यपां पाय्वन्तमुच्यते। हृदयांशस्तथाग्न्यंशो भूमध्यान्तोऽ निलांशकः ॥
पैर से लेकर घुटने तक का भाग पृथिवी का अंश कहा गया है। घुटने से लेकर गुदा तक का भाग जल का अंश बतलाया गया है। गुदा भाग से ऊपर हृदय प्रदेश तक का क्षेत्र अग्नि अंश माना गया है। हृदय से ऊपर भौहों के मध्यभाग तक वायु का अंश निश्चित किया गया है।
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