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जाबाल दर्शन • अध्याय 7 • श्लोक 10
सर्वपापानि नश्यन्ति भवरोगश्चं सुव्रत । नासांध्यां वायुमाकृष्य निश्चलः स्वस्तिकासनः ॥
इस भाँति प्रत्याहार की क्रिया में रत बुद्धिमान् पुरुष के सभी पाप एवं जन्म-मृत्युरूप समस्त व्याधियाँ स्वयमेव नष्ट हो जाती हैं।
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