मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
जाबाल दर्शन • अध्याय 7 • श्लोक 1
अथातः संप्रवक्ष्यामि प्रत्याहारं महामुने। इन्द्रियाणां विचरतां विषयेषु स्वभावतः ॥
हे महामुने! अब मैं प्रत्याहार का वर्णन करता हूँ। विषय-भोगों में स्वभाववश विचरण करने वालो समस्त इन्द्रियों को बलात् वहाँ से वापस लाने का जो प्रयत्न है, उसी को प्रत्याहार कहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जाबाल दर्शन के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

जाबाल दर्शन के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें