मकारं तु स्मरन्पश्चाद्रेचयेदिडयाऽनिलम्। एवमेव पुनः कुर्यादिडयापूर्य बुद्धिमान् ॥
तत्पश्चात् बत्तीस मात्राओं से 'मकार' का ध्यान करते हुए इड़ा नाड़ी के द्वारा शनैः शनैः वायु को बाहर निकाल दे। बुद्धिमान् मनुष्य इसी तरह बार-बार अभ्यास करे।
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